जी हाँ यह कहना है के कौंसिल जनरल तकायुकी कितागावा का | जापान में टोकियो के पास किचीजोजी शहर है | तकायुकी ने दयानंद सागर कॉलेज के छात्रों को उनका ग्रेजुएशन पूरा होने पर यह बात कही | उन्होंने कहा की इस शहर की उत्पति देवी लक्ष्मी के नाम पर हुई थी और जापानी भाषा में किचीजोजी का अर्थ लक्ष्मी मन्दिर है | उन्होंने ने कहा कि भारत और जापान का रिश्ता सदियों पुराना है | जापान में हिन्दू देवी देवताओं के बहुत सा मन्दिर है | उन्होंने आगे कहा कि जापानी भाषा के कई शब्द संस्कृत से लिए गये है | लगभग 500 जापानी शब्दों की उत्पति संस्कृत और तमिल भाषा से हुई है | इसका अर्थ यह है प्राचीन भारतीय संस्कृति पुरे विश्व में थी और विश्व का कोई भी कोना ऐसा नहीं होगा जहाँ हिन्दू संस्कृति की झलक न दिखती हो चाहे उसके नाम अलग अलग हों |
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Tuesday, 6 November 2018
Sunday, 4 November 2018
कैराना के बाद अब दिल्ली से भी हिन्दुओं का पलायन शुरू |
जी हाँ अभी कैराना को भूलना मुश्किल है लेकिन वैसी ही स्थिति दिल्ली में भी शुरू हो गई है जहाँ से हिन्दुओं को पलायन पर मजबूर होना पड़ रहा है | यह बात है दिल्ली की ब्रह्मपुरी कॉलोनी की जहाँ पर कैराना जैसे हालात बने हुए हैं | यहाँ की गली नम्बर 8 से हिन्दुओं ने पलायन शुरू कर दिया है और मकानों के बाहर बिकाऊ लिखा है | इस गली में हिन्दू मुस्लिम दोनों रहतें है लेकिन इलाके में मुस्लिम आबादी ज्यादा होने की वजह से हिन्दुओं को जाना पड़ रहा है | गली की फैक्ट्री को खरीद कर मस्जिद बना दिया गया है और वहाँ पर नमाज़ पड़ी जाती है | लेकिन जब वहाँ के हिन्दुओं ने विरोध किया तो हजारों की संख्या में मुस्लिम आये और कट्टर नारे लगाने शुरू कर दिए | लोगों का कहना है की रोज मुस्लिम लडके आते है और गंदी गंदी गलियां देकर चले जाते है | गली का नाम पांडव गली है लेकिन अब इसका नाम बदलने में देर नहीं लगेगी | हिन्दुओं के पलायन के बाद मुस्लिम आबादी बड़ती जा रही है | लेकिन यहाँ के राजनेता भी मस्जिद में जातें है और नमाज पड़ते हैं | इसी स्थिति नजाने भारत के कई इलाकों में होगी लेकिन पांडव गली एक और कैराना बन चुकी है |

Saturday, 6 October 2018
कभी अमेरिका भी था अखंड भारत का हिस्सा |
जी हाँ यह बात सत्य है कि अमेरिका भी कभी अखंड भारत का हिस्सा हुआ करता था | यह बात आपको कुछ अजीब जरुर लगेगी लेकिन इसका प्रमाण आरक्योलोजी सर्वे और कई विदेशी इतिहासकारों ने दिया है | आइये जानते है वो प्रमाण जिससे साबित होता है कि अमेरिका भी कभी भारत का हिस्सा था |
पुराने समय में अमेरिका को पाताल लोक के नाम से जाना जाता था , जो की नागराज का राज्य हुआ करता था |
पुराने समय में अमेरिका को पाताल लोक के नाम से जाना जाता था , जो की नागराज का राज्य हुआ करता था |
- वाल्मीकि रामायण में कुछ पंक्तिया है जिनमें कहा गया है कि राजा साला कतंकता जो की प्राचीन दक्षिण भारत जिसे आज श्री लंका कहा जाता है में राज करता था उसको हराया गया और हारने के बाद सभी ने पाताल लोक यानि आज के अमेरिका में शरण ली | अहि-रावण और मही-रावण उन राजाओं में से थे जिन्होंने आगे चलकर इस धरती यानि अमेरिका का विकास किया | मेक्सिको के कुछ प्राचीन दस्तावेज यह बताते है की Quet Salakatali जो की काफी दूर से आया था और उसने यहाँ के लोगों को कई कलाओं में निपुण किया | डॉ W.H Prescott जो की CONQUEST OF MEXICO के लेखक हैं ने इन दस्तावेजों को गम्भीरता से झांचा और यह परिणाम निकाला कि Quet Salakatali का असली नाम Sala Katankata था जो की भारत से आया था |
- James Churchman की खोजों ने भी यह प्रमाण दिया है कि पुराने समय में पूर्व से अमेरिका में लोग आये जो बहुत ही शक्तिशाली थे और शिक्षा , खेती , ज्योतिष , निर्माण कला आदि में निपुण थे और उन्होंने यहाँ की सभ्यता की नीवं रखी | रेड इंडियन अमेरिका के मूल निवासी थे | होपी और हूजा नाम की जाती के लोग अहिंसा , शांति पर विश्वास रखते थे और वे शाकाहारी थे |
- Johan Hopkins की किताबो को लेखों में यह माना गया है कि प्राचीन भारत से संत और व्यापारी अमेरिका में आते थे और उन्होंने प्राचीन अमेरिका के विकास में बहुत योगदान दिया |
- हवाई उत्तर अमेरिका से 2400 मील की दुरी पर है जो कि बहुत से टापुओं का समूह है और यहाँ भारत के राजा राज करते थे | यही नहीं आज भी यहाँ के मूल निवासी मानते हैं कि उनके पूर्वज भारतीय थे | और उनकी भाषा में बहुत संस्कृत के शब्द भीं हैं | यहाँ पर हुई खुदाई में मिली चीज़े वैसी ही है जैसे मोहन जोदारो और हड़प्पा की खुदाई में मिली थी |
- डा Martin द्वारा की गई इतिहासिक और मानवशास्त्रीय खोज ने भी यह साबित किया है कि पूर्वी सूर्यवंशी राजवंश ने प्राचीन अमेरिका का विकास किया था और कई महत्वपूर्ण अर्क्योलोगिकल सर्वे में अमेरिका में बहुत से सूर्य मन्दिर भी मिले है जो बताते है की अमेरिका कभी भारत का ही हिस्सा था |
- Guatemala में की गई खोजों से यहाँ माया सभ्यता का पता चलता है जिनके रीती रिवाज भारत से मिलते थे | और वे भी ज्योतिष शास्त्र में पूर्ण थे | Leally Mitchell द्वारा लिखी गई किताब Conquest Of Maya में ऐसे कई प्रमाण है जिनसे पता चलता है कि माया सभ्यता और प्राचीन भारत में घनिष्ट सम्बन्ध थे |
- मेक्सिको के कोपान मन्दिर में 1800 फुट का शिवलिंग और कई चित्र यह बताते है की यहाँ प्राचीन भारत का बहुत प्रभाव था |
इन सभी तथ्यों से यह पता चकता है की प्राचीन अमेरिका में भारत का प्रभाव था यानि भारत की सीमाओं में अमेरिका तक भी था |
Ref: Contribution of India to Global Cultural Civilazation
Friday, 14 September 2018
पीरों की मज्जारों की ये सच्चाई, जानकर होंगे हैरान_एक महत्वपूर्ण जानकारी
आज भारत में पीरों की मज्जारों पर हिन्दू बड़े ही सम्मान के साथ जाता है | लेकिन क्या हमें पता है कि भारत में बहुत सी मज्जारे उन मुस्लिम हमलावरों के नाम पर बनाई गई हैं जिन्होंने भारत पर आक्रमण करके यहाँ के मन्दिरों को तोडा और हमारी संस्कृति को तहस नहस कर दिया | आइये आज जानते है कुछ मज्जारों का ऐसा ही इतिहास |
- बहराइच के बाले मियां पीर : यह महमूद गजनवी का भांजा था जिसने उसे सोमनाथ मन्दिर पर आक्रमण करने के लिए प्रेरित किया था | यह गजनवी के साथ भारत आया था | यह पंजाब से होते हुए बेहरीच को गया | आज भी जो मुस्लिम आक्रमणकारी युद्ध में मरे गये उनके नाम पर नजाने कितनी ही मज्जारे इस रस्ते पर बनी हुई है | आज इन लोगों के नाम के साथ गाजी पीर बाबा लगाया जाता है और गाजी का अर्थ होता है काफ़िर का वध करने वाला | जिस मिया पीर की आज म्ज्जार बनी हुई है वह 10 जून 1034 को राजा सुहेल देव के हाटों मारा गया था |
- लखनऊ के खम्मन पीर बाबा : यह मज्जार लखनऊ रेलवे स्टेशन की पटरियों के बीचो बिच स्थित है और 30 से 35 वर्षों से लगातार अपना विस्तार कर रही है और सरकारी जमीन पर कब्जा किये हुए है इस पर लगे पत्थर के अनुसार यह सलार मसूद गाजी के साथ आया था और युद्ध करते हुए यहाँ मारा गया था |
- दिलकुशा लखनऊ के हजरत शहीद कासिम बाबा : यह भी सलार मसूद के साथ भारत आया था और हिन्दुओं की मारता हुआ मर गया था और इसको शहीद का दर्जा दिया गया है |
- मीर बख्त्यार की मजजार : इसे सालार मसूद ने कानपूर पर हमले के लिए भेजा था और वहां मारा गया | और इसकी मज़ार आज हिन्दुओं के लिए श्रधा का केंद्र है |
- शेख जलालुदीन तबरिजी : यह बंगाल में रहता था और इसने काफी सारी हिन्दू जमीन पर कब्जा किया हुआ था | वह देवतलला चला गया और वहां के हिन्दू मन्दिर को तोड़ कर वहाँ खानकाह बना डाली| इसी की स्मृति में देवतलला आज तरिजाबाद के नाम से जाना जाता है |
Reference: Pathik Sandesh...
Wednesday, 12 September 2018
मन्दिर जाने के ये हैं वैज्ञानिक कारण ,जानकर होंगे हैरान |
हिन्दू संस्कृति का आधार विज्ञान ही है | चाहे वह कोई त्यौहार हो यां फिर पूजा पाठ की विधि सब कुछ विज्ञान पर आधारित है | इसी तरह मनिदर जाने के भी अपने विज्ञानिक महत्व हैं जिन्हें जानकर आपको हर रोज मन्दिर जाना चाहिए |
- मन्दिरों का निर्माण स्थान : हिन्दू मन्दिरों को उस जगह बनाया जाता है जहाँ सकारात्मक उर्जा हो | अगर हम इतिहासिक मन्दिरों को देखें तो भगवान की मूर्ति को गर्भ स्थान में ही स्थापित किया जाता है | और मन्दिर का गर्भ स्थान वही होगा जहाँ सबसे जयादा सकारात्मक उर्जा होगी | तो मन्दिर वहीं बनाये जाते हैं जहाँ सकारात्मक उर्जा सबसे ज्यादा हो और वहाँ जाने वाले को वह उर्जा मिल सके |
- मन्दिरों के बाहर जुते उतारना : प्राचीन काल में मन्दिरों के फर्श उन धातुओं से बनाये जाते थे जो चुब्कीय उर्जा को आसानी से प्रवाहित कर सकें | और जब हम जुते उतार कर मन्दिर में जाते है तो उर्जा हमारे पैरों के रस्ते बिना किसी रोक के हमारे अंदर प्रवेश करती है | इसका दूसरा कारण मन्दिर की स्वच्छता को भी बनाये रखना है |
- घंटी बजाने से श्रवण इंद्री सक्रिय होती है : जी हाँ जब हम मन्दिर में प्रवेश करतें है तो घंटी जरुर बजाते हैं | जब हम घंटी बजाते हैं तो उससे निकलने वाली ध्वनी हमारी श्रवण इंद्री को सक्रिय करती है | और हमारे सातों चक्रो को भी जगाती है |
Tuesday, 11 September 2018
पृथ्वीराज चौहान नहीं सबसे पहले इस रानी ने हराया था गौरी को |
आज हमें यह तो पता है कि मौहम्मद गौरी को पृथ्वीराज चौहान ने 16 बार हराया था लेकिन क्या किसी को पता है कि मौहम्मद गौरी को हराने वाली एक रानी भी थी ? जी हाँ मौहम्मद गौरी को चालुक्य की रानी नायकी देवी ने करारी शिकस्त दी थी | उस समय गौरी मुल्तान जीतकर अनहिलवाड की और चल पड़ा | चालुक्य नरेश अजयपाल की म्रत्यु हो गई थी और उनके पुत्र अभी छोटी आयु के थे | इसलिए रानी नायकी देवी को ही राज्य सम्भालना था | लेकिन जब रानी को गौरी के हमले की खबर मिली तो उसने सेना की कमान अपने हाथों में ली और उसे रोकने के लिए चल पड़ी | रानी को पता था अगर गौरी को यहाँ नहीं रोका गया तो वो सोमनाथ मन्दिर तक पहुँच जायेगा और पुरे दक्षिण राजस्थान और गुजरात पर मुस्लिम सत्ता आ जाएगी | नायकी देवी ने आबू की पहाड़ी की तलहटी में कयरूद्र नामक ग्राम के पास विशाल मैदान पर शत्रु से टक्कर लेने का निर्णय किया | मूलराज को साथ लेकर रानी नायकी देवी रणभूमि में उतरी और दिन भर के युद्ध के बाद युद्ध क्षेत्र अफगानों का कब्रिस्तान बन गया | युद्ध में मोहमद गौरी को घायल आवस्था में उसके सैनिक लेकर भाग गये | इस तरह मोहमद गौरी को रानी नायकी देवी ने बुरी तरह से हराया |

Friday, 7 September 2018
गाय की परिक्रमा करने से बड़ती है शारीरिक उर्जा |
भारत की परम्परा में जितनी भी मान्यताएं है उन सब का विज्ञानिक आधार है | ऐसी ही एक परम्परा है गाय की परिक्रमा करना | जी हाँ यह सत्य है की गाय और तुलसी की परिक्रमा करने से हमारे शरीर की उर्जा में वृद्धि होती है | आभा मंडल नापने वाले एक यंत्र यूनिवर्सल स्कैनर से किये गये परिक्षण से यह सिद्ध हुआ है कि गाय, तुलसी, पीपल ,सफेद ,आक आदि की पूजा के पीछे एक बहुत ही बड़ा विज्ञानिक महत्व है | हम सब ने देवी देवताओं या सिद्ध व्यक्तियों के चित्रों में उनके सिर के पीछे एक चमकता हुआ घेरा देखा होगा | उसे आभा मंडल कहतें है और हर एक व्यक्ति का अपना आभा मंडल होता है | प्रसिद्ध परमाणु विज्ञानिक मेनन मूर्ति द्वारा किये गये परीक्षणों से यह सिद्ध हुआ है की अगर कोई व्यक्ति तुलसी की 9 बार परिक्रमा करे तो उसके आभा मंडल का दायरा बड़ जाता है | यही दायरा देसी गाय की परिक्रमा करने से भी बड़ा पाया गया | लेकिन आज की पीड़ी अपनी परम्पराओं का मजाक उड़ाती है लेकिन हमारी सभी परम्पराओं के पीछे गहरा विज्ञानिक महत्व है | इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें |धन्यवाद |
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