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Tuesday, 6 November 2018

देवी लक्ष्मी के नाम पर है जापान के इस शहर का नाम

जी हाँ यह कहना है के कौंसिल जनरल तकायुकी कितागावा का | जापान में  टोकियो के पास किचीजोजी शहर है | तकायुकी ने दयानंद सागर कॉलेज के छात्रों को उनका ग्रेजुएशन पूरा होने पर यह बात कही | उन्होंने कहा की इस शहर की उत्पति देवी लक्ष्मी के नाम पर हुई थी और जापानी भाषा में किचीजोजी का अर्थ लक्ष्मी मन्दिर है | उन्होंने ने कहा कि भारत और जापान का रिश्ता सदियों पुराना है | जापान में हिन्दू देवी देवताओं के बहुत सा मन्दिर है | उन्होंने आगे कहा कि जापानी भाषा के कई शब्द संस्कृत से लिए गये है | लगभग 500 जापानी शब्दों की उत्पति संस्कृत और तमिल भाषा से हुई है | इसका अर्थ यह है प्राचीन भारतीय संस्कृति पुरे विश्व में थी और विश्व का कोई भी कोना ऐसा नहीं होगा जहाँ हिन्दू संस्कृति की झलक न दिखती हो चाहे उसके नाम अलग अलग हों | 

कैराना के बाद अब दिल्ली से भी हिन्दुओं का पलायन शुरू |






Saturday, 6 October 2018

कभी अमेरिका भी था अखंड भारत का हिस्सा |

जी हाँ यह बात सत्य है कि अमेरिका भी कभी अखंड भारत का हिस्सा हुआ करता था | यह बात आपको कुछ अजीब जरुर लगेगी लेकिन इसका प्रमाण आरक्योलोजी सर्वे और कई विदेशी इतिहासकारों ने दिया है | आइये जानते है वो प्रमाण जिससे साबित होता है कि अमेरिका भी कभी भारत का हिस्सा था |
पुराने समय में अमेरिका को पाताल लोक के नाम से जाना जाता था , जो की नागराज का राज्य हुआ करता था |


  • वाल्मीकि रामायण में कुछ पंक्तिया है जिनमें कहा गया है कि राजा साला कतंकता जो की प्राचीन दक्षिण भारत जिसे आज  श्री लंका कहा जाता है में राज करता था उसको हराया गया और हारने  के बाद सभी ने पाताल लोक यानि आज के अमेरिका में शरण ली | अहि-रावण और मही-रावण उन राजाओं में से थे जिन्होंने आगे चलकर इस धरती यानि अमेरिका का विकास किया |  मेक्सिको के कुछ प्राचीन दस्तावेज यह बताते है की Quet Salakatali जो की काफी दूर से आया था और उसने यहाँ के लोगों को कई कलाओं में निपुण किया | डॉ W.H Prescott जो की CONQUEST OF MEXICO के लेखक हैं ने इन दस्तावेजों को गम्भीरता से झांचा और यह परिणाम निकाला  कि Quet Salakatali  का असली नाम Sala Katankata था जो की भारत से आया था | 
  • James Churchman की खोजों ने भी यह प्रमाण दिया है कि पुराने समय में पूर्व से अमेरिका में लोग आये जो बहुत ही शक्तिशाली थे और शिक्षा , खेती , ज्योतिष , निर्माण कला आदि में निपुण थे और उन्होंने यहाँ की सभ्यता की नीवं रखी |  रेड इंडियन अमेरिका के मूल निवासी थे | होपी और हूजा नाम की जाती के लोग अहिंसा , शांति पर विश्वास रखते थे और वे शाकाहारी थे |
  • Johan Hopkins की किताबो को लेखों में यह माना  गया है कि प्राचीन भारत से संत और व्यापारी अमेरिका में आते थे और उन्होंने प्राचीन अमेरिका के विकास में बहुत  योगदान दिया |
  • हवाई उत्तर अमेरिका से 2400 मील की दुरी पर है जो कि बहुत से टापुओं का समूह है और यहाँ भारत के राजा राज करते थे | यही नहीं आज भी यहाँ के मूल निवासी मानते हैं कि उनके पूर्वज भारतीय थे | और उनकी भाषा में बहुत  संस्कृत के शब्द भीं हैं | यहाँ पर हुई खुदाई में मिली चीज़े वैसी ही है जैसे मोहन जोदारो और हड़प्पा की खुदाई में मिली थी | 
  • डा Martin द्वारा की गई इतिहासिक और मानवशास्त्रीय खोज ने भी यह साबित किया है कि पूर्वी सूर्यवंशी राजवंश ने प्राचीन अमेरिका का विकास किया था और कई महत्वपूर्ण अर्क्योलोगिकल सर्वे में अमेरिका में  बहुत से सूर्य मन्दिर भी मिले है जो बताते है की अमेरिका कभी भारत का ही हिस्सा था |
  • Guatemala में की गई खोजों से यहाँ माया सभ्यता का पता चलता है जिनके रीती रिवाज भारत से मिलते थे | और वे भी ज्योतिष शास्त्र में पूर्ण थे | Leally Mitchell द्वारा लिखी गई किताब Conquest Of Maya में ऐसे कई प्रमाण है जिनसे पता चलता है कि माया सभ्यता और प्राचीन भारत में घनिष्ट सम्बन्ध थे |
  • मेक्सिको के कोपान मन्दिर में 1800 फुट का शिवलिंग और कई चित्र यह बताते है की यहाँ प्राचीन भारत का बहुत प्रभाव था | 
इन सभी तथ्यों से यह पता चकता है की प्राचीन अमेरिका में भारत का प्रभाव था यानि भारत की सीमाओं में अमेरिका तक भी था | 

Ref: Contribution of India to Global Cultural Civilazation