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Tuesday, 19 February 2019

SAINT JAMES SCHOOLS- लंदन के इस स्कुल में संस्कृत जरूरी यह है वजह

सभ्यता को प्रकृति के करीब लाने का स्त्रोत और कोई नहीं संस्कृत साहित्य है | वेद वेदांत महाभारत गीता आदि संस्कृत साहित्य मनुष्य के मानसिक , आत्मिक और आध्यात्मिक विकास के जरूरी है यह कहना लंदन के संत जेम्स स्कूल का है | इस स्कूल में संस्कृत पिछले 4 3 साल से अनिवार्य है और स्कूल में राम-कृष्ण महाभारत-रामायण आदि की कहानियां बताई जाती हैं | भोपाल से मोतीलाल बनारसीदास प्रकाशन इस स्कूल को संस्कृत का साहित्य उपलब्ध करवाता है | 
इस स्कूल की स्थापना 1975  में हुई थी और 1993 को कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में संस्कृत को विषय के रूप में शामिल करने की मदद इसी स्कूल ने की थी | इंग्लैंड में संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए इंटरनेशनल जनरल सर्टिफिकेट ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन और  यूनिवर्सिटी ऑफ कैंब्रिज इंटरनेशनल द्वारा अंतराष्ट्रीय स्तर पर पाठ्यक्रम उपलब्ध करवाया गया है | 2008  में इंटरनेशनल संस्कृत एगजामिनेशन रेसौरस सोसाइटी का भी गठन किया | इसका उद्देश्य संस्कृत के प्रति लोगों को जागरूक करना है | 
स्कूल का कहना है कि संस्कृत दुनिया की 9सबसे समृद्ध भाषा है यह शब्दावली ,साहित्य और विचारों में भी समृद्ध है | और यह विश्व की लगभगः सभी भाषाओं से उन्नत है और उनकी जननी है | 
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Tuesday, 6 November 2018

देवी लक्ष्मी के नाम पर है जापान के इस शहर का नाम

जी हाँ यह कहना है के कौंसिल जनरल तकायुकी कितागावा का | जापान में  टोकियो के पास किचीजोजी शहर है | तकायुकी ने दयानंद सागर कॉलेज के छात्रों को उनका ग्रेजुएशन पूरा होने पर यह बात कही | उन्होंने कहा की इस शहर की उत्पति देवी लक्ष्मी के नाम पर हुई थी और जापानी भाषा में किचीजोजी का अर्थ लक्ष्मी मन्दिर है | उन्होंने ने कहा कि भारत और जापान का रिश्ता सदियों पुराना है | जापान में हिन्दू देवी देवताओं के बहुत सा मन्दिर है | उन्होंने आगे कहा कि जापानी भाषा के कई शब्द संस्कृत से लिए गये है | लगभग 500 जापानी शब्दों की उत्पति संस्कृत और तमिल भाषा से हुई है | इसका अर्थ यह है प्राचीन भारतीय संस्कृति पुरे विश्व में थी और विश्व का कोई भी कोना ऐसा नहीं होगा जहाँ हिन्दू संस्कृति की झलक न दिखती हो चाहे उसके नाम अलग अलग हों | 

कैराना के बाद अब दिल्ली से भी हिन्दुओं का पलायन शुरू |






Wednesday, 12 September 2018

मन्दिर जाने के ये हैं वैज्ञानिक कारण ,जानकर होंगे हैरान |

हिन्दू संस्कृति का आधार विज्ञान ही है | चाहे वह कोई त्यौहार हो यां फिर पूजा पाठ की विधि सब कुछ विज्ञान पर आधारित है | इसी तरह मनिदर जाने के भी अपने विज्ञानिक महत्व हैं जिन्हें जानकर आपको हर रोज मन्दिर जाना चाहिए | 


  • मन्दिरों का निर्माण स्थान : हिन्दू मन्दिरों को उस जगह  बनाया जाता है जहाँ सकारात्मक उर्जा हो | अगर हम इतिहासिक मन्दिरों को देखें तो भगवान की मूर्ति को गर्भ स्थान में ही स्थापित किया जाता है | और मन्दिर का गर्भ स्थान वही होगा जहाँ सबसे जयादा सकारात्मक उर्जा होगी | तो मन्दिर वहीं बनाये जाते हैं जहाँ सकारात्मक उर्जा सबसे ज्यादा हो और वहाँ जाने वाले को वह उर्जा मिल सके |



  • मन्दिरों के बाहर जुते उतारना : प्राचीन काल  में मन्दिरों के फर्श उन धातुओं से बनाये जाते  थे जो चुब्कीय उर्जा को आसानी से प्रवाहित कर सकें | और जब हम जुते उतार कर मन्दिर में जाते है तो उर्जा हमारे पैरों के रस्ते बिना किसी रोक के हमारे अंदर प्रवेश करती है | इसका दूसरा कारण मन्दिर की स्वच्छता  को भी बनाये रखना है |

  • घंटी बजाने से श्रवण इंद्री सक्रिय होती है : जी हाँ जब हम मन्दिर में प्रवेश करतें है तो घंटी जरुर बजाते हैं | जब हम घंटी बजाते हैं तो उससे निकलने वाली ध्वनी हमारी श्रवण इंद्री को सक्रिय करती है | और हमारे सातों चक्रो को भी जगाती है |






Tuesday, 11 September 2018

पृथ्वीराज चौहान नहीं सबसे पहले इस रानी ने हराया था गौरी को |

आज हमें यह तो पता है कि मौहम्मद गौरी को पृथ्वीराज चौहान ने 16 बार हराया था लेकिन क्या किसी को पता है कि मौहम्मद गौरी को हराने वाली एक रानी भी थी ? जी हाँ मौहम्मद गौरी को चालुक्य की रानी नायकी देवी ने करारी शिकस्त दी थी | उस समय गौरी मुल्तान जीतकर अनहिलवाड  की और चल पड़ा | चालुक्य नरेश अजयपाल की म्रत्यु हो गई थी और उनके पुत्र अभी छोटी आयु के थे | इसलिए रानी नायकी देवी को ही राज्य सम्भालना था | लेकिन जब रानी को गौरी के हमले की खबर मिली तो उसने सेना की कमान अपने हाथों में ली और उसे रोकने के लिए चल पड़ी | रानी को पता था अगर गौरी को यहाँ नहीं रोका गया तो वो सोमनाथ मन्दिर तक पहुँच जायेगा और पुरे दक्षिण राजस्थान और गुजरात पर मुस्लिम सत्ता आ जाएगी | नायकी देवी ने आबू की  पहाड़ी की तलहटी में कयरूद्र नामक ग्राम के पास विशाल मैदान पर शत्रु से टक्कर लेने का निर्णय किया | मूलराज को साथ लेकर रानी नायकी देवी रणभूमि में उतरी और दिन भर के युद्ध के बाद युद्ध क्षेत्र अफगानों का कब्रिस्तान बन गया | युद्ध में मोहमद गौरी को घायल आवस्था में उसके सैनिक लेकर भाग गये | इस तरह मोहमद गौरी को रानी नायकी देवी ने बुरी तरह से हराया | 
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